Making honey bee farming
पुष्प रस से शहद बनता है और पराग मधुमक्खियों के भोजन के काम आता है। पुष्प रस पुष्पों के अमृतकोष में पाया जाने वाला मीठा तरल पदार्थ होता है, जिसे मौन अपनी जीभ द्वारा चूस कर पेट में स्थित अमृत संग्रही थैली में एकत्रित कर देती है।
जब पुष्प रस को पूरी तरह षहद में बदल दिया जाता है, तब उसको भविष्य के प्रयोग हेतु कोठरी के भीतर भर दिया जाता है और कोठरी के मुँह को मोम की पतली परत से बन्द कर दिया जाता है।
पराग का संग्रह भी मौनों द्वारा फूलों से ही किया जाता है। वे इसे अपनी पिछली टाँगों के बीच बनी पराग टोकरियों में गोली के समान भर कर लाती हैं। बाहर से लौटने वाली मौनों का अपने पैरों पर लाल, हरा, नीला, सफेद व भूरे रंग का पदार्थ लाते हम अक्सर प्रवेश मार्ग से अन्दर प्रवेश करते समय देख सकते हैं। यही रंग बिरंगा पैरों पर लदा पराग होता है।
संग्रही मौन पराग को लाकर कोठरी में लापरवाही से फेंक जाती हैं। उनको सभाँलने का काम घर के सेवक मौनों को करना होता है। ज्यों ही कोई संग्रही मौन पराग का बोझ उतार कर बाहर को निकलती हैं सेवक मौनें उस कोठरी के पास पहुँच जाती हैं। उनमें से कोई कोठरी में घुसकर अपने सिर व जबड़े की सहायता से उस पराग के बोझ को तोड़कर एवं दबाकर कोठरी के तल में भंलीभाँति सभालकर रख देती हैं।
पानी का संग्रह भी मौनों द्वारा मधु संग्रही थैलों में किया जाता है। संग्रही मौन पानी का बोझ लेकर जब घर लौटती हैं तो उसे सेवक मौनों को थोड़ा-थोड़ा सौपकर स्वयं करने लगती हैं।
सेवक मौने पानी के बोझ को अपनी मधु संग्रही थैली में उतार लेती हैं और आवश्यकतानुसार काम में लाती रहती है। पानी का प्रयोग भोजन को पतला करने के लिए या भीतरी तापमान को अनुकूल बनाये रखने के लिए किया जाता है।

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