मधुमक्खियों की भाषा | Bee language

गोल नृत्य इस प्रकार का नृत्य तव किया जाता है जब भोजन का स्रोत घर के निकट हो।

नृत्य करने के पहले भोजन के नमूने करियों में बाँट दिये जाते हैं। अब खोजी मथुमक्खी छत्ते पर

एक गोल चक्कर लगाती है, यह पहले एक ओर घूमती है फिर दूसरी ओर छत्ते में विभिन्न स्थानों

पर यह नृत्य किया जाता है। अन्य कमरियाँ इस नृत्य को देखकर उत्तेजित हो जाती है तथा नृत्य करते

हुए कमेरी को अपनी श्रमिकाओं द्वारा स्पर्श करती है। इस नृत्य का अर्थ यह होता है कि छत्ते के

आस-पास ही भोजन का प्रोत है जाकर छों और इकट्ठा करो।


पुच्छ अभिदोली नृत्य-


जब भोजन का ग्रोत घर से अधिक दूर हो तो इस नृत्य द्वारा स्रोत

की दिशा तथा दूरी बतायी जाती है। इस नृत्य में खोजी कमेरी लौटकर अंग्रेजी संख्या चपटा आठ

का चित्र बनाती हैं इस नृत्य में कमेरी एक प्रकार की सीथी दौड़ के साथ मुड़कर अर्थवृत्त बनाकर

अपने प्रस्थान विन्दु पर लौट आती है और उसी सीथी दौड़ को दोहराती हुई विपरीत दिशा में

अर्थवृत्त बनाकर फिर से प्रस्थान बिन्दु पर लौट आती है।


सीथे दीड़ के समय यह अपने वक्ष को

अगल-बगल से जोर-जोर से हिलाती है और अपनी उड़ान पेशियों द्वारा भिनभिनाने की कलस्वर

ध्वनि 30-250 साइकिल/सेकेन्ड के हिसाब से करती है। इस ध्वनि तथा अभिदोलन गति को अपनी

स्पर्श इन्द्रियों द्वारा जान जाती है। इससे उन्हे पता चलता है कि कितने समय और किस गति से उड़ने

की जरूरत है। ताकि स्रोत पर पहुंच जायें।


दिशा शान-


पुच्छ अभिदोली नृत्य में सीथी दौड़ के वक्त कमेरी का सिर छत्ते के ऊपरी भाग

की और होने का अर्थ स्रोत दिशा सूर्य की ओर तथा सिर नीचे की ओर करने का अर्थ स्रोत सूर्य

की विपरीत की दिशा में है। भोजन को लाने जाते समय और इसकी सूर्य की ओर तथा दाये है तो

लौटते वक्त यह सूर्य के विपरीत तथा बायें और उड़ती है।


यदि घर से जाते समय सूर्य की विपरीत

और बायीं ओर उड़ान भरेगी तो लीटते वक्त सूर्य की दायीं तथा सूर्य की दिशा में उड़कर घर लौटेगी।

सूर्य के बादलों से ढका होने पर भी मधुमक्खी को इसकी स्थिति का पता रहता है क्योंकि पराबैंगनी

और पोलाराइन प्रकाश किरण तक पहुंचती है।


रंगों का बोध-


मधुमक्खी भी मनुष्यों की भांति रंगों को पहचानती है। मथुमक्खी प्रकाश की

उन लघु तरंगों को भी देख सकती है। जिन्हें आदमी नहीं देख सकता। मधुमक्खी 4 विभिन्न प्रकार

के रंगों पीला, नीला, हरा और पराबैगनी को देख सकती है।


मधुमक्खी का चारा-


मधुमक्खी फूल में उसी समय जाती है जब उनमें पराग और मकरंद

उपलव्य हो और अलग-अलग फूलों पर जाती है। यदि सुबह सरसों के फूल से तो दोपहर बाद संतरे

के फूल से मधु का संचय करती है। भोजन संचय करने की मात्रा, मोत की दूरी पर निर्भर करती

है। यह अपने भार से 50-70 प्रतिशत मकरंद का बोझ लाती है।


फूलों से पराग एकत्र करने के लिए कमेरी मुखांग से फूल के पराग कोष को कुरेदती है और

चाटकर पराग के कणों को पिछली टॉगों में स्थिति करंड (पराग टोकरी) में रखती है। एक पराग

के बोझ का वजन 11 से 30 मिग्रा० तक पाया गया है। एक पराग बोझ को जमा करने के लिए

इनको लगभग 350 फूलों में भ्रमण करना पड़ता है। इनमें ये 20-30 मिनट लगाती है। और इस

दौरान इसके भार में 6 मिग्रा० की कमी आ जाती है।


भोजन को संचय करने हेतु दैनिक फेरो की संख्या, वातावरण की परिस्थितियों (तापक्रम, हवा,

नमी और सूर्य का प्रकाश) पराग तथा मकरंद का स्रोत और उसकी दूरी पर निर्भर करता है। परीक्षणों

में पाया गया है कि मकरंद को 8-110, पराग को 5-8 और पानी को एकत्र करने हेतु 5-100

फेरे लगाती है।

चारा मधुमक्खी की उड़ान की गति 25 मील प्रति घंटा होती है। चारा मधुमक्खी रास्ते में

स्रोत के स्थान में अपने शरीर से उत्पन्न फेरोमोन की गंथ छोड़ती है। जिससे उसके साथियों का

मार्गदर्शन होता रहे और वे भटकने से बच जाती है।


कमेरी तब तक भोजन इकट्ठा करने घर से बाहर नही जाती है जब तक कि वायु मंडलीय तापमान 15 डिग्री से० से ऊपर न हो। चारा मधुमक्खी किसी भी विशेष फूल में बार-बार तब तक जाती रहती है जब तक उनमें भोजन

मिलता है। चारा मधुमक्खी किसी विशेष फूल पर पराग के लिए औसतन 9 सेकेन्ड और मकरंद जमा

करने के लिए 7 सेकेन्ड तथा दोनों को जमा करने के लिए 12 सेकेन्ड लगाती है। एक चारा

मधुमक्रणी औसतन 8 मिग्रा० पराग लाती है जिसको जमा करने में उसको औसतन 20-25 मिनट लगता है।