ग्रीन शेल्टर | Green Shelter case study
चौदह वर्ष बहुराष्ट्रीय कम्पनियों में सेल्स एवं मार्केटिंग की नौकरी करने तथा 25 लाख के पैकेज को छोड़ने के बाद यह सोचना कि मैं अब नर्सरी का बिजनेस करूँगा। आप सोच सकते हैं कि इसके लिए कितनी हिम्मत या कित्तने कमिटमेंट्स की जरूरत होगी और कैसे फैमिली को उन्होंने मनाया होगा कि नहीं मैं कुछ अच्छा कर सकता हूँ। आज हम लोग ग्रीन सेंटर के अभिजीत जी से बात करेंगे।
आपके स्टार्टअप में नया क्या है?
ये स्टार्टअप हमने 2016 में शुरू किया और कांसेप्ट हमारा सिंपल सा था। लोगों को पर्यावरण के बारे में जागरूक करें और हम कस्टमर्स को पौधे न देकर उनको एक इमोशन के साथ जोड़े। पर्यावरण के अतिरिक्त कस्टमर्स को उनके स्वास्थ्य लाम के बारे में भी शिक्षित करें। यदि आप इसको एक उद्यम के रूप में देखे तो मैं आपको बता दूं कि मैं सेल्स और मार्केटिंग के बैकग्राउण्ड से हूँ, तो मुझे इससे रेवन्यू भी लेना था।
मेरा ऐसा मानना था कि मैं इस बिजनस में पौधे को एक उत्पाद के रूप में बेच सकता हूँ। हम प्रोडक्ट के अतिरिक्त उससे जुड़ी सभी सेवाएँ भी उपलब्ध कराते है। हमने एक ऐसी योजना तैयार की जिसमें उपभोक्ता हमसे पौधों को एक उत्पाद के रूप में खरीदे और इससे जुड़ी हुई सभी सेवाओं को हम उपभोक्ताओं को मुहैया कराये।
आपने मुझे जो दूसरा उत्पाद (गार्डिनिग लर्निग किट) दिखाया है इसके बारे में बताएँ?
यह गार्डेनिंग लर्निंग किट है जिसे हमने तीन महीने पहले ही विकसित किया है। इसके बनाने का उद्देश्य है कि अभी तक जो हमारे बच्चे हैं उनके पास वातावरण से संबंधित कोई लर्निग किट उपलब्ध नहीं है। हाँ, वे सैद्धान्तिक रूप से किताबों में पढ़ते है पर उन्हें यह नहीं पता होता कि कैसे बीज की बुआई करते हैं, कैसे पौधे को उगाते हैं, या सब्जियों को कैसे घर पर उगाया जाता है।
इस प्रकार से यह लर्निंग किट पौधा उगाने संबंधी सभी चीजों को सिखाने में मददगार साबित होगी। इस लर्निंग किट के अंदर छोटे-छोटे पाँच मॉट हैं जिनमें कोकोपिट है जो कि मिट्टी की जगह उपयोग में लाया जा सकता है तथा पानी पड़ते ही यह कोकोपिट अपने आकार से पाँच गुणा ज्यादा मात्रा में बढ़ जाता है। इसके अतिरिक्त इसमें विभिन्न गार्डेनिंग टूल्स भी दिये गये हैं जिसे मिट्टी में उपयोग किया जा सकता है और यह पूरी तरह सुरक्षित है। हर लर्निंग किट् के साथ हम
दो प्रकार के बीजों का पैकेट भी दे रहे हैं जिसमें खीरा एवं पालक के 20-25 बीज रखे गये है जो कि एक छोटे परीक्षण के लिए पर्याप्त है जिससे कि छोटे स्तर पर सब्जियाँ उगाई जा सकती है। इसके अतिरिक्त इस किट में निर्देशात्मक पुस्तिका भी रखी गयी है, जिसमें क्रमबद्ध तरीकों से विभिन्न पहलुओं को चित्रात्मक एवं लिखित तरीकों से दर्शाया गया है
जिसे बच्चे आराम से बीज अंकुरण प्रक्रिया को सीख सकते है। यह किट बाजार में आसानी से उपलब्ध है इसके अतिरिक्त यह आमेजन फिल्पिकार्ट जैसी ऑनलाईन मार्केटिंग साईट्स पर भी उपलब्ध है जिसे आसानी से खरीदा जा सकता है।
जब भी हम बिजनेस की बात करते हैं तो उसका एक यू.एस.पी. होता है इस प्रकार आपके इस पूरे स्टार्टअप का यू.एस.पी क्या है?
बहुत ही साधारण सी बात है कि हम ग्राहकों की हैंड होल्डिंग करते है। हम ग्राहकों को केवल पौधे ही प्रदान नहीं करते बल्कि हम उन्हें विश्वास में लेते हुए अपने पौधों को ले जाने की सलाह देते है। पहले हम ग्राहकों की आवश्यकताओं को समझ लेते हैं। अभी के समय में हर घर में सूरज की रौशनी पहुँचने की समस्या है। यदि आप अपार्टमेन्ट में रह रहे हैं तो संभव है कि आपके घरों तक धूप सही तरह से नहीं पहुंच पाये
यदि आप स्वयं के घर में रह रहें हैं तो हो सकता है कि आपके घर में पर्याप्त रौशनी आती हो। इस प्रकार, हम ग्राहकों की जरुरत को समझ लेते है कि वो फल वाला पौधा लगाना चाहते हैं या फूल वाले पौधे लगाना चाहते हैं या पत्तीदार राजावटी पौधे
लगाना चाहते हैं। एक बार ग्राहकों की आवश्यकता समझने के बाद हम उन्हें बताते हैं कि यदि आपके घरों में अगर पर्याप्त धूप नहीं आ रही है तो आप इनडोर प्लान्ट्रा को लगायें जैरो एरेकापार्म, स्नेकप्लान्ट आदि के बारे में बताते है।
जब आपने साल 2016 में इसकी शुरुआत की तब आपको किन-किन चुनौतियों का सामन करना पड़ा?
जब हम किसी भी व्यवसाय की शुरुआत करते है तो पहली समस्या वित्त से सबंधित होती है। चूंकि यह मेरी योजना थी तो मैं इसके लिए पहले से ही तैयार था इसलिए यह मेरे लिए कोई बड़ी समस्या नहीं हुई किन्तु यह क्षेत्र मेरे लिए पूर्णतः नया था इसलिए मेरे लिए इस क्षेत्र की पूरी जानकारी प्राप्त करना निहायत ही आवश्यक था और वह मुझे आसानी से प्राप्त नहीं हो पा रही थी। जब मैं पटना में था तब सूचना एकत्र करने में मुझे बड़ा समय लगा।
आपके हिसाब से इस कृषि के इस विशिष्ट क्षेत्र में कितनी संभावना है?
मेरे हिसाब से कृषि का यह क्षेत्र अभी पूरी तरह से बैरन लैण्ड है। विपणन एवं बिक्री के क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण बात है: हेड काउन्ट्स, जैसे कि भारत की 130 करोड़ की जनसंख्या को हमारे लिए 130 करोड़ ग्राहक समझना। जैसे पटना शहर की आबादी यदि 20 लाख है तो हमारे लिए पटना शहर में 20 लाख ग्राहक है। यदि हम महीने में 1 लाख ग्राहक को रु. 100 की चीज भी बेच दे तो उस हिसाब से आप समझ सकते हैं. । यह पूरी तरह से निर्भर करता है कि आप चीजों को किस तरह से देखते है।
मेरे हिसाब से कृषि या अन्य क्षेत्रों में माँग एवं पूर्ति के बीच काफी बड़ा फर्क हैं। उदाहरण के तौर पर जैविक उत्पाद एवं जैविक सब्जियाँ इत्यादि जिनकी सप्लाई नियमित तौर पर नहीं हो पाती लेकिन इनकी मोंग बहुत ज्यादा है तथा लोग इन पर ज्यादा मूल्य देने पर भी तैयार है ऐसा मेरा मानना है।
लेकिन इन चीजों की ज्यादा सप्लाई नहीं है। मेरे हिसाब से इस क्षेत्र मैं बहुत संभावनाएँ हैं तथा किसी प्रकार की प्रतिस्पर्धा नहीं है। मेरे जैसे दस लोग भी अगर इस क्षेत्र में आते हैं तो भी कोई समस्या नहीं होगी और सबका व्यवसाय अच्छा चलेगा।
आपने साल 2016 से व्यवसाय शुरु करते हुए एक बाजार तैयार किया है तथा आप अपने से चीजों का उत्पादन एवं उनकी देखभाल भी कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त आपने अन्य वाटिकाओं के साथ भी संबंध स्थापित किया है आप दूसरे शहरों एवं राष्ट्रीय स्तर पर अपने व्यवसाय की श्रृंखला कैसे बनाएँगें?
मेरी पहली योजना बिहार में ही इस व्यवसाय को विस्तारित करने की है। अगले दो-तीन सालों में पटना के बाद मुजफ्फरपुर फिर राँची में इस व्यवसाय को विस्तारित करने की योजना है। इसके अतिरिक्त पूरे भारत में ऑनलाईन तरीकों से हम अपने उत्पादों की बिक्री कर रहे है। भौतिक रुप से अभी तक हम अपना नेटवर्क तैयार नहीं कर पाए हैं किन्तु भविष्य में इसे सुचारु रुप से क्रियान्वित करने की हमारी पूरी योजना है।
आप हमारे उद्यमियों को क्या सुझाव देना चाहेंगे?
मेरे हिसाब सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप जिस भी व्यवसाय को शुरु करना चाहते है उसके बारे में गहराई से अध्ययन करें। उसके फायदों और कमियों को पूर्ण रुप से पहचान लें।
इन सभी चीजों को समझने के बाद ही उस व्यवसाय की शुरुआत करनी चाहिए प्रारंभ का आत्मविश्वास अच्छा है परंतु समय के साथ हम जो सीखते हैं वह ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। या तो आपने इसके पहले काफी अध्ययन कर रखा है अथवा आपका कोई प्रारंभिक कार्य अनुभव है तो ठीक है यदि नही
तो इस नये क्षेत्र में व्यापार प्रारंभ करने के लिए उचित मार्गदर्शन आवश्यक होगा। एक तो आपको उस क्षेत्र की तकनीकी जानकारी होनी चाहिए साथ ही साथ विपणन की जानकारी भी होना आवश्यक हैं। यदि आपकी उरा क्षेत्र में तकनीकि दक्षता है तो आप उत्पाद तो बना लेगें लेकिन आपके लिए यह जानना आवश्यक होगा कि उत्पाद की बिक्री कैसे की जाए। क्योंकि उत्पाद की विक्री आसान काम नहीं है।
लोग बिना कारण रु. 10 भी खर्च नहीं करना चाहते। हो सकता है कि आपका उत्पाद आपके अनुसार बहुत अच्छा हो किन्तु ग्राहक को वह अच्छा नहीं भी लग सकता है। इन बातों को समझना बहुत ही आवश्यक है। मेरे अनुसार, आजकल हम लोग जो को-फाउन्डस बनकर उद्यम को खड़ा करते हैं उससे एक दूसरे की मदद कर सकते है।
श्री अभिजीत जी की उद्यम यात्रा से हमने क्या सीखा आईये जानते हैं:
• नर्सरी का व्यवसाय तो बहुत लोग करते हैं मगर अभिजीत जी ने पौधों के साथ दूसरी सेवाओं को भी समाहित किया एवं बाजार के उस अंतर को भी समझने की भी कोशिश की। इसके अतिरिक्त अभिजीत जी ने लोगों को पौधे बेचने के साथ-साथ शिक्षित भी किया और साथ ही इसको पर्यावरण से भावनात्मक रुप से जोड़ने का प्रयास किया।
• उद्यमिता की मान्यता है कि उद्यम को शुरु करने हेतु उस क्षेत्र में तकनीकी दक्षता होना आवश्यक है, मगर अभिजीत जी को कृषि क्षेत्र में गहरी जानकरी न होने के बावजूद वह इस क्षेत्र के एक सफल उद्यमी है।
. अभिजीत जी ने अपने व्यवसाय में बहुत सारे नवाचार किये।
• उत्पाद की गुणवत्ता तो महत्वपूर्ण है मगर उसकी नियमित उपलब्धता ग्राहक के लिए ज्यादा जरूरी है।
• अभिजीत जी ने अपने उद्यम को बढ़ावा देने हेतु टीम के साथ नेटवर्क भी तैयार किया।
अभिजीत जी ने कई वर्षों तक नौकरी करने के बाद अपना उद्यम स्थापित किया। उन्हें
विश्वास था कि उद्यम के माध्यम से बड़े क्षेत्र में अपनी सेवा देकर लाभ प्राप्त करेगें। • उद्यम के शुरुआती दिनों में पैसों की उपलब्धता एक महत्पूर्ण घटक होता है।
• एक उद्यम को ऊँचाई तक ले जाने हेतु ग्राहकों की संख्या महत्वपूर्ण है।
• ग्राहक बिना किसी ठोस कारण के पैसा खर्च नहीं करता।

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